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“"तुमने हमें पूज पूज कर पत्थर कर डाला ; वे जो हमपर जुमले कसते हैं हमें ज़िंदा तो समझते हैं "~ हरिवंश राय बच्चन”

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T 3619 - "राम कीनह चाहें सो होई ; करें अन्यथा कछु नहीं होई  ।।"

श्रावणी शुक्रवार  !

T 3619 - "राम कीनह चाहें सो होई ; करें अन्यथा कछु नहीं होई ।।" श्रावणी शुक्रवार !

T 3619 - "कुछ तो चाहत होगी इन बारिशों की बूंदों की भी वरना कौन गिरता है इस जमीन पर आसमान तक पहुंचने के बाद..."🙏🌺🙏🌺 ~ Ef ss

T 3618 - 'आस्‍था'
~ हरिवंश राय बच्चन
 
तुमने
प्रतिमा का सिर काट लिया,
पर लोगों ने उसे सिर झुकाना नहीं छोड़ा है।
तुमने मूर्ति को नहीं तोड़ा,
लोगों की आस्‍था को नहीं तोड़ा है।
और आस्‍था ने
बहुत बार
कटे सिर को कटे धर से जोड़ा है।

T 3618 - 'आस्‍था' ~ हरिवंश राय बच्चन तुमने प्रतिमा का सिर काट लिया, पर लोगों ने उसे सिर झुकाना नहीं छोड़ा है। तुमने मूर्ति को नहीं तोड़ा, लोगों की आस्‍था को नहीं तोड़ा है। और आस्‍था ने बहुत बार कटे सिर को कटे धर से जोड़ा है।

CORRECTION : कल T 3617 pe जो कविता छपी थी , उसके लेखक , बाबूजी नहीं  हैं  । वो ग़लत था  । उसकी रचना , कवि प्रसून जोशी ने की है  ।
इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ  । 🙏🙏
उनकी कविता ये है  -

CORRECTION : कल T 3617 pe जो कविता छपी थी , उसके लेखक , बाबूजी नहीं हैं । वो ग़लत था । उसकी रचना , कवि प्रसून जोशी ने की है । इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ । 🙏🙏 उनकी कविता ये है -

T 3617 - the previous tweet is T 3617 ... NOT 3817 .. sorry

T 3817 -
'अकेलेपन का बल पहचान 
शब्द कहाँ जो तुझको टोके 
हाथ कहाँ जो तुझको रोके 
राह वही है, दिशा वही है, तू करे जिधर प्रस्थान 
अकेलेपन का बल पहचान  ।

जब तू चाहे तब मुसकाए,
जब चाहे तब अश्रु बहाए,
राग वही तू जिसमें गाना चाहे अपना गान  ।
अकेलेपन का बल पहचान  ।'

~ hrb

T 3817 - 'अकेलेपन का बल पहचान शब्द कहाँ जो तुझको टोके हाथ कहाँ जो तुझको रोके राह वही है, दिशा वही है, तू करे जिधर प्रस्थान अकेलेपन का बल पहचान । जब तू चाहे तब मुसकाए, जब चाहे तब अश्रु बहाए, राग वही तू जिसमें गाना चाहे अपना गान । अकेलेपन का बल पहचान ।' ~ hrb

T 3617 - 
तू न रुकेगा कभी ; यू ना मुड़ेगा कभी ; तू ना झुकेगा कभी ; 
कर शपथ कर शपथ कर शपथ ;
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ  !!

T 3617 - तू न रुकेगा कभी ; यू ना मुड़ेगा कभी ; तू ना झुकेगा कभी ; कर शपथ कर शपथ कर शपथ ; अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ !!

T 3617 -
'The world is no more what it was in the times of quiet love... Everything is called Status nowadays... and it goes on the internet like a rule... 

After all, we are a democracy... there will never be a consensus...' ~ ef s

T 3617 - 'The world is no more what it was in the times of quiet love... Everything is called Status nowadays... and it goes on the internet like a rule... After all, we are a democracy... there will never be a consensus...' ~ ef s

T 3616 - "दुआएं जमा करते रहिए.... सुना है जायदाद, शौहरत ऐवं घमंड साथ नहीं जाते...।" ~ef


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